मेरी सुरती सुहागन जाग रे
मेरी सुरती सुहागन जाग रे
क्या तु सोवे मोह निंद में, उठके भजन बिच लाग रे
अनहद शबद सुनो चित्त दे के, उठत मधुर धुन राग रे ... मेरी
चरन शिश धर बिनती करियो, पावेगे अचल सुहाग रे,
कहत कबीर सुनो भाई साधो, जगत पीठ दे भाग रे ... मेरी
क्या तु सोवे मोह निंद में, उठके भजन बिच लाग रे
अनहद शबद सुनो चित्त दे के, उठत मधुर धुन राग रे ... मेरी
चरन शिश धर बिनती करियो, पावेगे अचल सुहाग रे,
कहत कबीर सुनो भाई साधो, जगत पीठ दे भाग रे ... मेरी
मेरी सुरती सुहागन जाग रे
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