मन तुम भजन करो जग आईकै.

मन तुम भजन करो जग आईकै.

दुर्लभ साज मुक्ति देही, भूले माया पाईकै,
लगी हाट सौदा कब करिहौ, का करिहौ घर जाईकै… मन तुम

चतुर चतुर सब सौदा कीन्हा, मूरख मूल गंवाईकै,
कहै कबीर सुनो भाई साधो, गुरूके चरण चित लाईकै…मन तुम

मन तुम भजन करो जग आईकै.

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