#Kabir Bhajan, #Kabir Dohe Kabir Dohe ! Vol. 2 ! कबीर के दोहे। 1 माला फेरत जुग भया, फिरा न मन का फेर, कर का मनका डार दे, मन का मनका फेर। अर्थ: कोई व्यक्ति लम्बे समय तक हाथ में लेकर मोती की माला तो घुमा अगस्त 04, 2019 1 शेयर करें
#Kabir Bhajans, #Kabir Dohe कबीर के दोहे। Vol.1 ! Kabir Dohe 💠💠💠💠💠💠💠💠💠💠💠💠💠💠 1 🔘 बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय, जो दिल खोजा आपना, मुझसे बुरा न कोय। अर्थ: जब मैं इस संसार में बुराई खोजने चला तो अगस्त 04, 2019 शेयर करें