बरसन लाग्यो रंग शबद चढ लाग्यो री

पानी में मीन पियासी, मोहि सुन-सुन हावे हाँसी ।

नैहरवा हम का न भावे, न भावे रे ।

नींद निशानी मौत की, उठ कबीरा जाग, ओर रसायन छांडी के, नाम रसायन लाग ।

झीनी झीनी बीनी चदरिया ॥

जनम तेरा बातों ही बीत गयो । तुने कबहुँ न राम कह्यो, तुने कबहुँ न कृष्ण न कह्यो ॥

चलना है दूर मुसाफिर काहे सोवे रे